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यह पता लगाना कि योग आपके शारीरिक और मानसिक भलाई को कैसे बदल देता है

मानसिक कल्याण 1

भारद्वज का ट्विस्ट

**विवरण:**

इस योग आसन में, शरीर एक तरफ घूमता है, जिसमें एक हाथ विपरीत पैर पर रखा गया है और दूसरा हाथ स्थिरता के लिए फर्श पर रखा गया है। सिर शरीर के रोटेशन का अनुसरण करता है, जिसमें टकटकी की ओर टकटकी की ओर निर्देशित होता है।

**फ़ायदे:**

रीढ़ की लचीलापन और गतिशीलता को बढ़ाता है।

पाचन में सुधार करता है और अंग स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है।

पीठ और गर्दन में तनाव से राहत देता है।

शरीर की मुद्रा और संतुलन को बढ़ाता है।

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नौका

**विवरण:**

नाव की मुद्रा में, शरीर पीछे की ओर झुक जाता है, कूल्हों को जमीन से उठाता है, और दोनों पैर और धड़ एक साथ उठाते हैं, जिससे एक वी आकार होता है। हथियार पैरों के समानांतर आगे बढ़ सकते हैं, या हाथ घुटनों को पकड़ सकते हैं।

मानसिक कल्याण 2
मानसिक कल्याण 3

**फ़ायदे:**

मुख्य मांसपेशियों को मजबूत करता है, विशेष रूप से रेक्टस एब्डोमिनिस।

संतुलन और स्थिरता में सुधार करता है।

पेट के अंगों को मजबूत करता है और पाचन तंत्र में सुधार करता है।

आसन में सुधार करता है, पीठ और कमर में असुविधा को कम करता है।

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धनुषाकार

**विवरण:**

धनुष पोज में, शरीर जमीन पर सपाट होता है, पैर झुकते हैं, और हाथ पैरों या टखनों को पकड़ते हैं। सिर, छाती और पैरों को ऊपर की ओर उठाकर, एक धनुष का आकार बनता है।

**फ़ायदे:**

छाती, कंधे और सामने के शरीर को खोलता है।

पीठ और कमर की मांसपेशियों को मजबूत करता है।

पाचन अंगों और चयापचय को उत्तेजित करता है।

लचीलापन और शरीर की मुद्रा में सुधार करता है।

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ब्रिज पोज

**विवरण:**

ब्रिज पोज़ में, शरीर जमीन पर सपाट होता है, पैर झुकते हैं, कूल्हों से मध्यम दूरी पर फर्श पर पैरों को रखा जाता है। हाथों को शरीर के दोनों ओर रखा जाता है, हथेलियों का सामना करना पड़ता है। फिर, glutes और जांघ की मांसपेशियों को कसने से, कूल्हों को जमीन से हटा दिया जाता है, जिससे एक पुल बन जाता है।

मानसिक भलाई
मानसिक कल्याण 5

**फ़ायदे:**

रीढ़, ग्लूट्स और जांघों की मांसपेशियों को मजबूत करता है।

छाती का विस्तार करता है, श्वसन समारोह में सुधार करता है।

शरीर के अंतःस्रावी प्रणाली को संतुलित करते हुए, थायरॉयड और अधिवृक्क ग्रंथियों को उत्तेजित करता है।

पीठ दर्द और कठोरता से राहत देता है।

ऊँट का पोज

**विवरण:**

ऊंट मुद्रा में, एक घुटने की स्थिति से शुरू करें, कूल्हों या एड़ी पर रखे गए कूल्हों और हाथों के समानांतर घुटनों के साथ। फिर, शरीर को पीछे की ओर झुकें, कूल्हों को आगे बढ़ाते हुए, छाती को उठाते हुए और पीछे की ओर टकटकी लगाते हुए।

**फ़ायदे:**

सामने का शरीर, छाती और कंधे खोलता है।

रीढ़ और पीठ की मांसपेशियों को मजबूत करता है।

लचीलापन और शरीर की मुद्रा में सुधार करता है।

अधिवृक्क ग्रंथियों को उत्तेजित करता है, चिंता और तनाव से राहत देता है।


पोस्ट टाइम: मई -02-2024